Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 38, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

चित्तादेवायं संसार आगतश्चित्तमय एव चित्तमात्रं चित्त एव स्थित इति विज्ञातम् । विषयश्चमृगतृसर्वमुपशान्तमभूद्वासनैवेति ज्ञ एवास्तीति ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त से ही यह संसार प्राप्त हुआ हे, अतएव यह चित्तमय ही हे । चित्तमय क्यों ? बल्कि केवल चित्तमात्र है तथा चित्त में ही स्थित है, ऐसा पहले विचारपूर्वक निर्णय किया जा चुका हे । सब विषय ओर सब चित्तवृत्तिर्यो ये दोनों जब शान्त होकर वासनारूप हो जाते हैं, तब वासना से उपहित जीव ही रहता हे