Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
प्रबुद्धबुद्धेः प्रक्षीणभोगेच्छस्य निराशिषः ।
नास्त्यविद्यामलमिति युक्तं वक्तुं महात्मनः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसकी बुद्धि प्रबुद्ध हो गई हे, भोगेच्छा क्षीण हो
गई है ओर कामना मिट गई है, उस महात्मा में अविद्यारूपी मल नहीं हे, अतएव उसके लिए यह सब ब्रह्म
ही है, ऐसा उपदेश देना उचित हे