Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अपरीक्ष्य च यः शिष्यं प्रशास्त्यतिविमूढधीः । स एव नरकं याति यावदाभूतसंप्लवम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसे तत्त्वज्ञान नहीं है, वही अनधिकारी को उपदेश देने के लिए प्रवृत्त होता है । शिष्यो को ठगनेवाले उस अतत्त्वज्ञानी का नरकपतन उचित है, इस आशय से कहते है । जो अत्यन्त विमूढबुद्धि (अतत्त्वज्ञानी) शिष्य की परीक्षा किये बिना उपदेश देता है, वह प्रलयपर्यन्त नरक को प्राप्त होता है