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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

इति संचिन्त्य भगवानज्ञानतिमिरापहः । तमुवाच मुनिश्रेष्ठो वसिष्ठो भूमिभास्करः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा विचारकर अज्ञानरूपी अन्धकार का विनाश करनेवाले अतएव भूमि में स्थित सूर्य के सदृश मुनिश्रेष्ठ भगवान श्रीवसिष्ठजी ने श्रीरामचन्द्रजी से कहा