Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
नात्र कश्चित्कर्ता न भोक्ता न विनाशमेति ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस जगत में न कोई कर्ता है, न भोक्ता हे,
न यह जगत विनाश को प्राप्त होता है