Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
केवलमात्मतत्त्वे साक्षिणि निरामये समतयात्मनि नित्यमसंक्षुब्धे तिष्ठति सत्येवं संपद्यते ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
साक्षी निर्विकार केवल आत्मतत्त्व के नित्य अपने में
समरूप से क्षोभरहित रहने पर ऐसा होता है