Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 39, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
लोकात्परादुपायान्ति तस्मिश्चित्त्वाद्विशन्त्यलम् ।
तन्मया एव सततं तरङ्गा इव सागरे ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
सागर में तरंगों के समान परमात्मा से सब उत्पन्न होते हैं, उसी में लीन हो जाते हैं और चित्
होने के कारण निरन्तर तन्मय ही है