Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 4, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 4, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
मनः सर्वमिदं राम तस्मिन्नन्तश्चिकित्सिते ।
चिकित्सितो वै सकलो जगज्जालामयो भवेत् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, यह सारा जगत मन ही
है। मन का प्रतीकार होने पर सब जगजंजालरूपी रोग का प्रतीकार हो जाता है