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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 4, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 4, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

एतच्च संभवत्येव मनोव्याधिचिकित्सिते । दृश्यात्यन्तासंभवात्म परमौषधमुत्तमम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे कि मनरूपी रोग आशभ्यंतर है, दृश्य तो बाह्य है ऐसी अवस्था में बाह्य पदार्थों के अत्यन्त बाध से आभ्यन्तर मन की चिकित्सा कैसे हो सकती ? इस पर कहते हैं। यह दृश्य का अत्यन्त अभावरूप सर्वोत्तम परम औषधि मनरूपी व्याधि की चिकित्सा में अमोघ उपाय है