Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
उत्पत्तिः कथमेतेषां जीवानां ब्रह्मणः पदात् ।
कियती कीदृशी चेति विस्तरेण वद प्रभो ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे प्रभो, ब्रह्मपद से इन जीवों की उत्पत्ति कैसे हुई, वह कितनी और कैसी
है ? यह विस्तारपूर्वक मुझसे कहने की कृपा कीजिये
सर्ग सन्दर्भ
उनतालीसवाँ सर्ग समाप्त चालीसवाँ सर्ग विविध जीवों की उपाधियों द्वारा उत्पत्ति, जीवों तथा उनकी उपाधियों के ब्रह्मभाव का विस्तार से वर्णन ।