Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
अनन्तस्यात्मतत्त्वस्य एकदेशः क उच्यते ।
कथं विकारिता वा स्यात्कथं वा द्वयविक्रमः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
स्पन्दः सत्तैकदेशत:” यह जो कथन है, वह अयुक्त है, क्योकि अखण्ड पूर्णसत्तैकरस ब्रह्म में
सत्तावयव स्यन्दन की सम्भावना नहीं हो सकती, ऐसी शंका श्रीरामचन्द्रजी करते हैं।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्, अनन्त आत्मतत्त्व का एकदेश क्या कहलाता है, उसमें विकारिता
कैसे होती है अथवा उसमें द्वित्व की भ्रान्ति कैसे होती है ?