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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । तेन जातं ततोजातमितीयं रचना गिराम् । शास्त्रसंव्यवहारार्थं न राम परमार्थतः ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

जीव-ब्रह्म की एकता की वास्तविकता के व्युत्पादन के लिए उत्पत्ति, स्पन्द ओर एकदेश आदि का व्यवहार शास्त्र मे कल्पित है, इसलिए वास्तविक वृत्ति का आश्रय करके उसमें विरोध का उद्भावन उचित नहीं है, इस आशय से श्रीवलिष्ठजी उत्तर देते है। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, यह जगत उस निमित्त से उत्पन्न है और उसी उपादान से पैदा हुआ है, यह वाणी की रचना शास्त्र के व्यवहार के लिए है वस्तुतः नहीं है