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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

विकारितावयवितादिक्सत्तादेशतादयः । क्रमा न संभवन्तीशे दृश्यमानोदया अपि ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

वस्तुतः क्यों नहीं है ? इस पर कहते हैं। प्रत्यक्ष उत्पद्यमानरूप से दिखाई दे रहे भी विकारिता, अवयविता, दिक्सत्ता, एकदेशता आदि क्रम सर्वेश्वर परमात्मा में सम्भावित नहीं हैं