Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
उक्तेरेव स्वभावोऽयमुक्तेरुक्तिरनन्तरम् ।
प्रतियोगिव्यवच्छेदसंख्याद्यर्थे न युज्यते ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह उक्ति का स्वभाव है कि एक उक्ति के
अनन्तर दूसरी उक्ति स्वाश्रयविरुद्ध भेद, द्वित्व आदि अर्थ युक्त हो जाती हे