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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

ऊर्मिजालमिवाम्भोधौ परे यः परिदृश्यते । शब्दोऽर्थकलनाकारस्तद्ब्रह्मैव विदुर्बुधाः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

समुद्र में तरंग- समूह की भाँति परब्रह्म मे जो शब्द ओर अर्थ की कल्पना का आकार है, वह ब्रह्म ही है, ऐसा विद्वानों ने अनुभव किया है