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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verses 36–37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verses 36–37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

एवंप्रायश्च हे प्राज्ञ सिद्धान्तस्ते भविष्यति । तत्रैवोदाहरिष्यामः सिद्धान्तार्थोक्तिपञ्जरम् ॥ ३६ ॥ इहाविद्यादिकाः केचिद्विद्यन्ते नेतरक्रमाः । ज्ञास्यस्यलमशेषार्थांस्तत्तदज्ञानसंक्षये ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मतिमान श्रीरामचन्द्रजी, जब आपका सिद्धान्त प्राय: ऐसा ही होगा, तभी हम सिद्धान्तअर्थ की उक्तियों के उदाहरणपूर्वक निर्वाणप्रकरण में उपपादन करेंगे