Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
अवस्तुसंक्षये वस्तु यथावस्तु प्रसीदति ।
यथा च दृश्यते दृश्यं जगन्नैशतमःक्षये ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस परमार्थता में अविद्या आदि कोई इतर पदार्थ विद्यमान नहीं हैं तत्-तत्
वस्तुविषयक तत्तद् अज्ञान का क्षय हो जाने पर आप सम्पूर्ण पदार्थों को पूर्ण ब्रह्म भाव से जानेंगे ॥ ३ ७॥
पूर्वोक्त अर्थ में दृष्टान्त कहते हैं।
जैसे अवस्तु यानी मल का क्षय होने पर वस्तु यथार्थरूप से प्रकट होती है और जैसे रात्रि के
अन्धकार का क्षय होने पर यह दृश्य जगत दृष्टिगोचर होता है, वैसे ही अज्ञान का क्षय होने पर जगत
ब्रह्मभाव से प्रतीयमान होता है