Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यदिदमखिलमाततं कुदृष्ट्या तदुपशमे तव राम निर्मलामे ।
अवितथपदनिर्मले भविष्यत्यवितथमेव न संशयोऽत्र कश्चित् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व में कहे गये सभी पदार्थो का उपसंहार करते है ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, आपकी अज्ञानदूषित दृष्टि से जो यह सम्पूर्ण जगत चारों ओर विस्तृत दिखाई
देता है, अज्ञान के साथ उसका नाश होने पर निर्मल दर्पण के तुल्य, परमार्थभूत, निर्मल परमपद में वही
एकमात्र परम पद स्थित होगा, इसमें कोई संशय नहीं हे