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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

ब्राह्मी चिच्छक्तिरमला कल्पयन्ती यदृच्छया । सर्वशक्तिः स्वयं चेत्यं भवत्याकलनात्मकम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

परत्रह्म की निर्मल चित्‌शक्ति, जो सर्वशक्तिशालिनी है अपनी इच्छा से विविध कल्पना करती हुई स्वयं भावी देहादि के आकार का स्फुरणरूप चेत्य (विषय) हो जाती है