Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 40, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
कृत्वा पद्मजसंकल्पं रूपं पश्यति पद्मजम् ।
ततो जगत्कल्पयति सप्रजापतिपूर्वकम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस आकाश में ब्रह्मा आदि की स्थूल देह की और भुवनो की कल्पना दशति हैं।
वह चित्तत्त्व ब्रह्मा का संकल्प करके ब्रह्मा के रूप को देखता है। तदनन्तर दक्ष आदि प्रजापति की
कल्पना कर जगत की कल्पना करता है