Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विवेकमाच्छादयति जगन्ति जनयत्यलम् ।
नच विज्ञायते कैषा पश्याश्चर्यमिदं जगत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके असम्भावित अनन्त कार्य देखे जाते हैं, इसलिए भी विरोध की सम्भावना नहीं है, इस
आशय से कहते हैं।
यह अविद्या विवेक का आवरण करती है, जगत को उत्पन्न करती है; परन्तु यह कौन है, इस तरह
ज्ञात नहीं होती। यह जगतरूपी आश्चर्य देखिए