Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अप्रेक्ष्यमाणा स्फुरति प्रेक्षिता सु विनश्यति ।
मायेयमपरिज्ञायमानरूपैव वल्गति ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जब तक विचारगोचर नहीं होती, तभी तक
स्फुरित होती है, विचारित होने पर नष्ट हो जाती है जब तक इसके स्वरूप का परिज्ञान नहीं होता,
तभी तक यह माया पराक्रम दिखलाती है