Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अहो नु खलु चित्रेयं माया संसारबन्धनी ।
असत्येवातिसत्येव स्वज्ञानं विहितं तया ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
ओह ! संसार को बाँधनेवाली यह माया सचमुच बड़ी
विचित्र हे । यद्यपि वह असत्य है, तथापि इसने अत्यन्त सत्य की भाँति अपना ज्ञान कराया है