Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अत्यभिन्नपदे तस्मिंस्तन्वाना भेदमाततम् ।
संसारमाया येनासौ तेनासौ पुरुषोत्तमः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस कारणवश संसार माया अत्यन्त भेदरहित उस परम पद में विस्तृत भेद का विस्तार कर रही है,
उसी कारणवश क्षर-अक्षर स्वरूप से अतीत यह आत्मा पुरुषोत्तम हे