Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 41, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
यदिदं दृश्यतां यातं मानसं मननं महत् ।
असन्मात्रमिदं यस्मान्मनोमात्रविजृम्भितम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त निश्चय को निश्वल करने मे हेतु कहते है ।
जो यह साक्षी से दृश्यता को प्राप्त मनोवृत्तिरूप सम्पूर्णं व्यवहार का कारण होने से विशाल
मनन यानी अतीत ओर अप्राप्त अर्थ का अनुसंधान है, यह असन्मात्र है; क्योकि केवल मन से ही
वृद्धि को प्राप्त हुआ है