Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
क्षणं स्फुरति सा देवी सर्वशक्तितया तया ।
चेतति स्वां स्वयं शक्तिं कलेन्दोः शीततामिव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए उसके कालिक परिच्छेद तथा उक्त थक्तिमत्ता आदि रूप भेदप्रतीति की उपपत्ति होती
है, ऐसा कहते है।
वह दैदीप्यमान चितृशक्ति अपनी उस सर्वशक्तिता से एक क्षणभर में स्फुरित होती है, जैसे
चन्द्रमा की कला अपनी शीतलता का स्वयं अनुभव करती है वैसे ही वह अपनी शक्ति का स्वयं अनुभव
करती हे