Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
यथा कटककेयूरैर्भेदो हेम्नो विलक्षणः ।
तथात्मनश्चितो रूपं भावयन्त्याः स्वमांशिकम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कटक-
केयुरों से सुवर्ण का भेद विलक्षण है वैसे ही अंशकल्पना के अधीन सम्पूर्णं जगद्रूप अपने स्वरूप की भावना
कर रहे चैतन्य का भेद विलक्षण है