Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
देशकालपरिस्पन्दशक्तिसन्दीपिताथ चित् ।
संकल्पमनुधावन्ती प्रयाति कलनापदम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
देश, काल ओर क्रिया की
शक्ति से संदीपित हुआ चैतन्य संकल्प का अनुसरण करता हुआ कल्पना को प्राप्त होता है