Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यत्तदप्यमृतं ब्रह्म सर्वव्यापि निरामयम् ।
चिदाभासमनन्ताख्यमनादि विगतभ्रमम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस भाँति सर्वव्यापक, निर्दोष, अनादि, अनन्त,
भ्रम कलंकरहित, अमृत ब्रह्म जीवरूप हुआ, उसे भी आप सुनिये