Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
बलीवर्दवदामग्नं मनो मदनपल्वले ।
आलूनशीर्णावयवं बलाद्राम समुद्धर ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, कामरूपी छोटी तलैया में वैल के समान खूब फँसे हुए तथा
चिरकाल तक विषयभोगो से पुण्यक्षय होने पर परलोक जाने के साधनों का अभाव होने से कटे हुए तथा
शिथिल हस्त, पाद आदि अवयववाले मन का आप प्रयत्न से उद्धार कीजिए