Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
स्वशिखास्पन्दशक्त्यैव दीपः सौम्यो यथोन्नतम् ।
एति तद्वदसावात्मा तत्स्वे वपुषि वल्गति ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
स्पन्दशक्ति का स्पन्दरहित प्रकाशशक्ति से भी विरोध नहीं है, इसमें दृष्टान्त देते हैं।
जैसे निश्चल दीपक अपनी ज्वाला की स्पन्दशक्ति से ही ऊपर को प्राप्त होता हे, वैसे ही यह
आत्मा भी अपने स्वरूप में ही प्रकाशित होता है