Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 42, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 42, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
जलान्तरेऽम्बुधिर्यद्वल्लसद्वारीव चञ्चलः ।
सर्वशक्तिर्वपुष्येव तथा स्पन्दविलासवान् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सागर शरद् ऋतु की धूप के सम्बन्ध से
चमक रहे जल प्रदेश में ही चंचल सा प्रतीत होता हे, वैसे ही सर्वशक्ति आत्मा अपने स्वरूप में ही
स्पन्दरूप विलास से युक्त होता हे