Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
केचित्कूश्माण्डवेतालयक्षरक्षःपिशाचकाः ।
केचिद्ब्राह्मणभूपाला वैश्यशूद्रगणाः स्थिताः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
कोई कूष्माण्ड, वेताल, यक्ष, राक्षस पिशाचरूप से स्थित हैं तथा कोई
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों के समूहरूप से स्थित है