Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
केचित्किंनरगन्धर्वविद्याधरमहोरगाः ।
केचिदर्केन्द्रवरुणास्त्र्यक्षाधोक्षजपद्मजाः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई किन्नर, गन्धर्व, विद्याधर तथा नागों की योनियों में हैं और कोई सूर्य, इन्द्र, वरूण हैं तथा
कोई शिव, विष्णु, ब्रह्मा हैं