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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

केचित्चित्रलतागुल्मतृणोपलदृशोऽभितः । केचित्कदम्बजम्बीरशालतालतमालकाः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

तो कोई भाँति-भाँति की लताओं, झाड़ियों, तिनकों और पर्वतों के रूप में चारों ओर विद्यमान हैं एवं कोई कदम्ब, नींबू, शाल, ताल और तमालरूप से स्थित हैं