Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
केचिद्भुजङ्गगोनासकृमिकीटपिपीलिकाः ।
केचिन्मृगेन्द्रमहिषमृगाजचमरैणकाः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई साँप, अजगर, कीड़े, मकोड़े ओर चींटियो के रूप में स्थित हैं,
कोई सिंह, भस, मृग, बकरे, चमरी, गाय और खरगोश के रूप में हे