Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
केचिदापद्वलाक्रान्ताः केचित्संपदमागताः ।
केचित्स्थिताः स्वर्गपुरे केचिन्नरकमास्थिताः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई बड़ी-बड़ी आपत्तियों से आक्रान्त हैं, तो कोई
बड़े समृद्धिशाली हैं, कोई स्वर्ग में विराजमान हैं, तो कोई नरको में पड़े हैं