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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

ऋक्षचक्रगताः केचिहृक्षरन्ध्रगताः परे । वातभूताः स्थिताः केचित्केचिद्व्योमपदेस्थिताः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

कोई तारा समूह में स्थित हैं, तो दूसरे वृक्षों के छिद्रों में बैठे हैं, कोई आवह, प्रवाह आदि वायुओं के अधिकार को प्राप्त हैं, तो कोई आकाश में अधिकार जमाये हैं