Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
सूर्यांशुषु स्थिताः केचित्केचिदिन्द्वंशुषु स्थिताः ।
केचित्तृणलतागुल्मरसस्वादुष्ववस्थिताः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई सूर्य की किरणों में (रस खींचने के अधिकार में)
स्थित है, तो कोई चन्द्रमा की किरणों में (औषधि आदि की वृद्धि करने में ) लगे हैं और कोई तृण, लता
और झाड़ी का रस जहाँ पर स्वाद् है, ऐसे पशु आदि के योग्य विषय लम्पटता में संलग्न हैं