Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्ता भ्रमन्तीह केचित्कल्याणभाजनाः ।
चिरमुक्ताः स्थिताः केचिन्नूनं परिणताः परे ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
कोई
मोक्ष के समुचित पात्र जीवन्मुक्त हो यहाँ पर भ्रमण करते हैं, कोई चिरकाल से मुक्त होकर स्थित हैं
और कोई परमात्मभाव को प्राप्त करते हैं यानी विदेहमुक्त हैं