Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
यथेयं हि जगत्सारं तथान्यानि जगन्त्यपि ।
विद्यन्ते समतीतानि भविष्यन्ति च भूरिशः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे यह विशाल ब्रह्माण्ड है वैसे ही और विशाल ब्रह्माण्ड भी बहुत से विद्यमान है, पहले थे
और आगे होगे