Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

अन्येनान्येन चित्रेण क्रमेणान्येन हेतुना । विचित्राः सृष्टयस्तेषामापतन्ति पतन्ति च ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

अन्यान्य विचित्र क्रम से ओर अन्यान्य विचित्र हेतुओं से उनकी विचित्र सृष्टियाँ आविर्भूत होती है और तिरोहित होती हैं