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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

स्वस्वभाववशावेशादन्योन्यपरिघट्टनैः । सृष्टयः परिवर्तन्ते तरङ्गिण्या इवोर्मयः ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कहे भले ही ऐसा हो, फिर उत्तमता, अधमता आदिरूप से और परस्पर स्नेह, विरोध आदिरूप से उन जीवों का सृष्टि परिवर्तन कैसे होता है, इस पर कहते हैं। जैसे परस्पर संघटन से नदी की लहरें परिवर्तित होती हैं वैसे ही सात्तिक राजस, तामस आदि स्वभाव के कारण तत्तदनुकूल व्यवहार में आग्रह से प्रवृत्त हुए उन जीवों की किसी एक विषय में स्पर्धावश परस्पर विमर्दन द्वारा सृष्टियों का परिवर्तन होता है