Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
आविर्भावतिरोभावैरुन्मज्जननिमज्जनैः ।
सृष्टयः परिवर्तन्ते तरङ्गिण्या इवोर्मयः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे नदीं की तरंगें आविर्भाव और तिरोभाव द्वारा
उन्मज्जन और निमज्जन से परिवर्तित होती हैं वैसे ही रज का आविर्भाव होने पर सृष्टि का उन्मज्जन
ओर सत्त्व तथा तम का निमज्जन होता है। तम के आविर्भाव से रज का तिरोभाव होने पर सृष्टि का
निमज्जन और बीज में सत्त्व का आविर्भाव होने पर पालन द्वारा सृष्टि का परिवर्तन होता है