Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अनारतं प्रतिदिशं देशे देशे जले स्थले ।
जायन्ते वा म्रियन्ते वा बुद्बुदा इव वारिणि ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
निरन्तर हर एक दिशा में, प्रत्येक देश में, जल में और स्थल में जल में बुद्बुदों की तरह वे
या तो उत्पन्न होते हैं या मरते हे