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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 43, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

स्ववासनादशावेशादाशाविवशतां गता । दशास्वतिविचित्रासु स्वयं निगडिताशयाः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

अपनी वासनामय दशा के आवेश से वे आशा के वशवर्ती हुए हैं और इस अतिविचित्र दशाओं में स्वयं आबद्ध हुए हैं