Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
पूर्वमेव मया प्रोक्तं राम किं नावबुध्यसे ।
पूवापरविचारार्हा शेमुषी क्व गता तव ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यह यद्यपि विशेषरूप से मैंने नहीं कहा, तथापि आपको अपनी बुद्धि से ही तर्क द्वारा समझ लेना चाहिये,
इसके लिए प्रश्न की आवश्यकता नहीं है, इस आशय से श्रीवस्रिष्ठजी कहते हैं :
हे रामचन्द्रजी, जो आपने मुझसे पूछा है, उसका उत्तर मैं पहले ही कह चुका हूँ। आपकी समझ
में क्यों नहीं आ रहा है, आपकी पूर्वापर के विचार में निपुण बुद्धि कहाँ चली गई है ?