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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

यदिदं हि शरीरादि जगत्स्थावरजङ्गमम् । आभासमात्रमेवेतदसत्स्वप्नमिवोत्थितम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जो यह शरीर आदि रूप स्थावर-जंगम जगत है, यह आभासमात्र ही (विवर्तमात्र ही) है, अतएव असत्‌ स्वप्न के समान उदित हुआ है