Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 44, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
स्वभावकल्पितो राम जीवानां सर्वदैव हि ।
आमोक्षपदसंप्राप्ति संसारोऽस्त्यात्मनोऽन्तरे ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
बीजभूत अज्ञान में भावी संसार मोक्ष होने तक सूक्ष्मरूप से रहता है, इस कारण भी बारबार जन्म
की उपपत्ति होती है, इस आशय से कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, जीवों के स्वभाव से कल्पित संसार अज्ञानात्मा के अन्दर सदा ही विद्यमान
रहता है, जिसकी मोक्ष होने तक लगातार प्राप्ति होती है