Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
बालो हि वितताकारैर्वस्तुरिक्तैः प्रयोजनैः ।
संतोषमेत्यनन्ताय दुःखाय न सुखाय तु ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
मूर्ख ही विशाल आकारवाले, अर्थशून्य सुखाभासों
से अपने असीम दुःख के लिए सन्तुष्ट होता हे, न कि सुख के लिए